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किसने गंगा तट पर जाकर केवट का सम्मान किया
औ निषाद को किसने अपनी मैत्री का वरदान दिया
गिद्धराज को प्रेम प्यार से किसने गले लगया था
भिलनी के बेरों को किसने भक्तिभाव से खाया था
वनवासी और दलित जनों पर अपना प्यार
लुटाना था
मात-पिता की आज्ञा का तो केवल एक बहाना था।
मातृभूमि की रक्षा करने प्रभु को वन में जाना था॥ |